नगरो का वर्गीकरण

जबसे भारत वर्ष एक बहुत बड़ा देश है, यह संभव नही कि नागरिक सुरक्षा संगठन गांव-गांव में या प्रत्येक शहर में किया जावे । इसके ध्यान में रखते हुए भारत शासन ने नगरों की दो श्रेणियां बनाई गई है । वे निम्न प्रकार है:-

  • (अ) प्रथम श्रेणी नागरिक सुरक्षा नगर :-
    वे नगर जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर से है, या जिन पर हवाई हमलों के कारण युद्ध सामग्री के बनाने में रूकावट पड़ती है और जिस कारण युद्धरत योद्धाओं की क्षमता पर अंतर पड़े वे प्रथम श्रेणी नागरिक सुरक्षा नगर कहे जाते है । जैसे- दिल्ली, आगरा, ग्वालियर आदि ।
  • (ब) द्वितीय श्रेणी नागरिक सुरक्षा नगर:-
    ये वे नगर है, जिसका महत्व प्रथम श्रेणी के नगरों से थोड़ा कम हो, जो अपने प्रधान यातायात केन्द्र है या जिन पर हवाई हमले होने से देश की अर्थ व्यवस्था पर असर पड़े, वे द्वितीय श्रेणी के नगर कहलाते है । जैसे- भिलाई भोपाल ।

वर्तमान् में केन्द्र सरकार द्वारा सिविल डिफेन्स को और अधिक कारगर बनाने के लिए जिला बिलासपुर स्थित गा्रम परसदा में सिविल डिफेन्स ट्रेनिंग स्कूल की स्थापना किया जा रहा है। जिसके तहत केन्द्र सरकार द्वारा सिविल डिफेन्स ट्रेनिंग स्कूल के निर्माण के लिए रू. 146.00 लाख ग्रान्ट इन एड जारी किया गया है। जिसके तहत हास्टल एवं प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य किया जा चुका है ।

  1. लोक सभा ने वर्ष 1968 में सिविल डिफेन्स एक्ट (क्रमांक 27) 28 मई 1968 से लागू कर दिया है, और उसके नियम तथा अधिनियम सारे भारत वर्ष में लागू है । मध्यप्रदेश राजपत्र दिनांक 09 अगस्त 1968 तथा 20 दिसम्बर 1968 में प्रकाशित किये गये है ।
  2. भिलाई शहर को ’’बी’’ श्रेणी का नागरिक सुरक्षा शहर केन्द्र द्वारा घोषित किया गया ।
  3. वर्ष 2009 में के.एम. सिंह समिति की सिफारिश पश्चात् रिवेम्पिंग आॅफ सिविल डिफेन्स का निर्णय लिया गया ।
  4. केन्द्र द्वारा नागरिक सुरक्षा शहर का दायरा बढ़ाते हुए सम्पूर्ण दुर्ग जिले को ’’बी’’ श्रेणी जिला घोषित किया गया है ।
  5. नगर सेना विभाग द्वारा पायलेट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 4 मास्टर ट्रेनर का नागपुर से प्रशिक्षित करवाया गया ।
  6. छत्तीसगढ़ दुर्ग को 3600 स्वयंसेवक नामांकित करने का लक्ष्य केन्द्र द्वारा दिया गया है ।
  7. माह फरवरी 2012 तक 3600 स्वयंसेवकों का नामांकन पूर्ण कर लिया गया है ।
  8. राज्य में पहली बार केन्द्र प्रवर्तित योजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में जिला दुर्ग में 3600 सिविल डिफेन्स वालेन्टियर्स के नामांकन का लक्ष्य रखा गया था। माह फरवरी 2012 तक लक्ष्य के अनुरूप 3600 स्वयंसेवकों का नामांकन पूर्ण हो चुका है।