नागरिक रक्षा (संशोधन) विधेयक, 2009

नागरिक सुरक्षा अधिनियम, 1968 में संशोधन करने के लिए

इस प्रकार भारत गणराज्य के साठवें वर्ष में संसद द्वारा इसे अधिनियमित किया जाए:-

  • इस अधिनियम को नागरिक रक्षा (संशोधन) अधिनियम, 2009 कहा जा सकता है।
  • नागरिक रक्षा अधिनियम, 1968 की धारा 2 में,--
  • (i) खंड में
    (a), "इस तरह के हमले का समय" शब्द के बाद, शब्द
    "या आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से पहले किए गए किसी भी उपाय, पहले, दौरान, दौरान, या किसी भी आपदा के बाद" डाला जाएगा;
  • (ii) खंड के बाद
    (f), निम्नलिखित खंडों को अर्थात् सम्मिलित किया जाएगा:--
    ‘(g) "आपदा" का मतलब आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (d) में परिभाषित एक आपदा है;
    '(h) "आपदा प्रबंधन" का अर्थ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 2 के खंड (e) में परिभाषित आपदा प्रबंधन है.’.

सिविल डिफेन्स के अंतर्गत मुख्यतः 12 सेवाओं का संचालन किया जाता है, जो निम्नानुसार है:-

  1. मुख्यालय सेवा
  2. वार्डन सेवा
  3. संचार सेवा
  4. हताहत सेवा
  5. अग्निशमन सेवा
  6. बचाव सेवा
  7. कल्याण सेवा
  8. उद्धार सेवा
  9. शवों का निपटान सेवा
  10. डिपो एवं परिवहन सेवा
  11. प्रशिक्षण सेवा
  12. आपूर्ति सेवा

सन् 1956 में मध्य प्रदेश का गठन होने पर इस विभाग को नये मध्य प्रदेश में विस्तृत किया गया। तदउपरान्त नवम्बर 2000 में मध्यप्रदेश से पृथक से हुए छत्तीसगढ़ राज्य में भी सतत् सिविल डिफेन्स का संचाालन किया जा रहा है । वर्तमान में छत्तीसगढ़ में सिविल डिफेन्स का मुख्यालय माना रायपुर में है । जिनके डायरेक्टर जनरल माननीय श्री गिरिधारी नायक है । जिलें में नागरिक सुरक्षा नियंत्रक जिला दण्डाधिकारी होते है ।